Mhara Agla Janam ka Sangati re म्हारा अगला जनम का संगाती

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meeabai bhajans
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Mhara Agla Janam ka Sangati

 म्हारा अगला जनम का संगाती रे

 म्हारा अगला जनम का संगाती रे

 थने ना भूलूंगा दिन राती

 

हां तुम देख्या हो बिना कल ना पड़त है

जाणे है म्हारी छाती जी

हरे ऊंची चढ़ चढ़ पथ निहारू 

रोई रोई अंखिया राती रे

म्हारा अगला जनम का संगाती रे

 

हां यो संनसार सकल जग झूठो 

झूठा कुल का नाती जी

हरे दोई कर जोड़ अरज करत हूं

 सुणली ली जो म्हारी बाती रे

म्हारा अगला जनम का संगाती रे

 

हां यो मन म्हारो बड़ो हारामी जैसो मकनो हाथी जी 

हरे सतगुरु हाथ धर्यो है सिर उपर

 अंकुश दे समझाते रे

म्हारा अगला जनम का संगाती रे

 

पल-पल पीयु का रूप निहारु निरख निरख सुख पाती जी 

हरे मीरा के प्रभु गिरिधर नागर हरि शरण सितलाती 

म्हारा अगला जनम का संगाती रे

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Mhara Agla Janam ka Sangati re Lyrics

 

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