ae ri sakhi me to prem diwani | सखी मैं प्रेम दीवानी

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meeabai bhajans
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ae ri sakhi me to prem diwani

सखी मैं प्रेम दीवानी

 हे री सखी मैं तो प्रेम-दिवानी मेरो दरद न जाणै कोई

हां धूली उपर सेज हमारी,किस विध मिलना होय

हे री सखी मैं तो प्रेम-दिवानी मेरो दरद न जाणै कोई

 

हां गगन मण्डल पर सेज पीया की किस विध मिलना होय

सखी री किस विध मिलना होय

हे री सखी मैं तो प्रेम-दिवानी मेरो दरद न जाणै कोई

 

हां घायल की गत घायल जाने, जो कोई घायल होय

हे री सखी मैं तो प्रेम-दिवानी मेरो दरद न जाणै कोई

 

जौहरि की गति जौहरी जाणै जो कोई जौहरी होय

हे री सखी मैं तो प्रेम-दिवानी मेरो दरद न जाणै कोई

 

 

दरद की मारी में बन बन डोलूं भेद मिल्या नही कोई

हे री सखी मैं तो प्रेम-दिवानी मेरो दरद न जाणै कोई

 

मीरा की प्रभु पीड़ मिटेगी जद मिलत सांवरिया होय

हे री सखी मैं तो प्रेम-दिवानी मेरो दरद न जाणै कोई

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ae ri sakhi me to prem diwani Lyrics

 

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