Aisa Aisa Lagan Lagaya ऐसा ऐसा लगन | Kabir Bhajan Lyrics

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Mhara Sasra Ne Kijo re
Mhara Sasra Ne Kijo re

Aisa Aisa Lagan Lagaya

ऐसा ऐसा लगन लगाया है

 

हां ऐसा ऐसा लगन लगाया गुरूजी ने

ऐसा ऐसा लगन लगाया है

जनम जनम से कुंवारी या सुरता अबके ब्याव रचाया है

 

हरि नाम की हल्दी लगाई चित का चिगसा मिलाया है 

हां दया धरम की मेहंदी लगाई  लाल लाल रंग आया है 

ऐसा ऐसा लगन लगाया गुरूजी ने

ऐसा ऐसा लगन लगाया है

जनम जनम से कुंवारी या सुरता अबके ब्याव रचाया है

 

आला लीला बांस कटाया मोत्या मंडल छाया है 

हां पांच पच्चीस मिल बैठी सहेलियां मिलकर मंगल गाया है

 ऐसा ऐसा लगन लगाया गुरूजी ने

ऐसा ऐसा लगन लगाया है

जनम जनम से कुंवारी या सुरता अबके ब्याव रचाया है

 

धूम धड़ाका से चली बाराता बाजा बैंड बजाया है 

हां आगे आगे ढोल बजत हैं बारातियों को नचाया है 

ऐसा ऐसा लगन लगाया गुरूजी ने

ऐसा ऐसा लगन लगाया है

जनम जनम से कुंवारी या सुरता अबके ब्याव रचाया है

 

अरे सूरत मूरत दोई फेरा रे फिरीया कन्यादान कराया है

 कहे कबीर सुनो भाई साधु बना परण घर आया है 

ऐसा ऐसा लगन लगाया गुरूजी ने

ऐसा ऐसा लगन लगाया है

जनम जनम से कुंवारी या सुरता अबके ब्याव रचाया है

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Aisa Aisa Lagan Lagaya Guruji Se Bhajan

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