Bigdi meri bana de | बिगड़ी मेरी बनादे ए शेरों वाली मैया

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jai ambe gauri
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Bigdi meri bana de

बिगड़ी मेरी बनादे ए शेरों वाली मैया

श्लोक – सदा पापी से पापी को भी तुम, मां भव सिंधु तारी हो, 

फसी मझधार में नैया को भी, पल में उबारी हो, 

न जाने कोन ऐसी भुल, मुझसे हो गयी मैया, 

तुम अपने इस बालक को मां, मन से बिसारी हो । 

 

बिगड़ी मेरी बनादे ए शेरों वाली मैया 

अपना मुझे बनाले ए मेहरों वाली मैया

 

दर्शन को मेरी अखियाँ कब से तरस रहीं हैं, 

सावन के जैसे झर झर अखियाँ बरस रहीं हैं, 

दर पे मुझे बुला ले, ए शेरों वाली मैया

 

आते हैं तेरे दर पे, दुनिया के नर और नारी, 

सुनती हो सब की विनती,मेरी मैया शेरों वाली, 

मुझ को दरश दिखा दे, ए मेहरों वाली मैया

 

‘शर्मा’ पे मेरी मैया द्रष्टि दया की कर माँ,

चरणों की धूल देकर ‘लख्खा’ की झोली भर माँ,

मरते को अब जीलादे  ए शेरों वाली मैया 

 

बिगड़ी मेरी बनादे ए शेरों वाली मैया 

अपना मुझे बनाले ए मेहरों वाली मैया

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लखबीर सिंह लक्खा

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Bigdi meri bana de ae sherowali maiya

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