Shiv chalisa lyrics – शिवजी का चालीसा

689
Shiv chalisa

Shiv chalisa lyrics

शिवजी का चालीसा

॥ दोहा ॥
जय गणेश गिरिजा सुवन, मंगल मूल सुजान ।
कहत अयोध्यादास तुम, देहु अभय वरदान ॥


॥ चौपाई ॥
जय गिरिजा पति दीन दयाला । सदा करत सन्तन प्रतिपाला ॥
भाल चन्द्रमा सोहत नीके । कानन कुण्डल नागफनी के ॥
अंग गौर शिर गंग बहाये । मुण्डमाल तन क्षार लगाए ॥
वस्त्र खाल बाघम्बर सोहे ।छवि को देखि नाग मन मोहे ॥ 4


मैना मातु की हवे दुलारी । बाम अंग सोहत छवि न्यारी ॥
कर त्रिशूल सोहत छवि भारी । करत सदा शत्रुन क्षयकारी ॥
नन्दि गणेश सोहै तहँ कैसे । सागर मध्य कमल हैं जैसे ॥
कार्तिक श्याम और गणराऊ । या छवि को कहि जात न काऊ ॥ 8


देवन जबहीं जाय पुकारा । तब ही दुख प्रभु आप निवारा ॥
किया उपद्रव तारक भारी । देवन सब मिलि तुमहिं जुहारी ॥
तुरत षडानन आप पठायउ । लवनिमेष महँ मारि गिरायउ ॥
आप जलंधर असुर संहारा । सुयश तुम्हार विदित संसारा ॥ 12


त्रिपुरासुर सन युद्ध मचाई । सबहिं कृपा कर लीन बचाई ॥
किया तपहिं भागीरथ भारी । पुरब प्रतिज्ञा तासु पुरारी ॥
दानिन महँ तुम सम कोउ नाहीं । सेवक स्तुति करत सदाहीं ॥
वेद नाम महिमा तव गाई। अकथ अनादि भेद नहिं पाई ॥ 16


प्रकटी उदधि मंथन में ज्वाला । जरत सुरासुर भए विहाला ॥
कीन्ही दया तहं करी सहाई । नीलकण्ठ तब नाम कहाई ॥
पूजन रामचन्द्र जब कीन्हा । जीत के लंक विभीषण दीन्हा ॥
सहस कमल में हो रहे धारी । कीन्ह परीक्षा तबहिं पुरारी ॥ 20


एक कमल प्रभु राखेउ जोई । कमल नयन पूजन चहं सोई ॥
कठिन भक्ति देखी प्रभु शंकर । भए प्रसन्न दिए इच्छित वर ॥
जय जय जय अनन्त अविनाशी । करत कृपा सब के घटवासी ॥
दुष्ट सकल नित मोहि सतावै । भ्रमत रहौं मोहि चैन न आवै ॥ 24


Shiv Chalisa lyrics in hindi


त्राहि त्राहि मैं नाथ पुकारो । येहि अवसर मोहि आन उबारो ॥
लै त्रिशूल शत्रुन को मारो । संकट से मोहि आन उबारो ॥
मात-पिता भ्राता सब होई । संकट में पूछत नहिं कोई ॥
स्वामी एक है आस तुम्हारी । आय हरहु मम संकट भारी ॥ 28


धन निर्धन को देत सदा हीं । जो कोई जांचे सो फल पाहीं ॥
अस्तुति केहि विधि करैं तुम्हारी । क्षमहु नाथ अब चूक हमारी ॥
शंकर हो संकट के नाशन । मंगल कारण विघ्न विनाशन ॥
योगी यति मुनि ध्यान लगावैं । शारद नारद शीश नवावैं ॥ 32


नमो नमो जय नमः शिवाय । सुर ब्रह्मादिक पार न पाय ॥
जो यह पाठ करे मन लाई । ता पर होत है शम्भु सहाई ॥
ॠनियां जो कोई हो अधिकारी । पाठ करे सो पावन हारी ॥
पुत्र हीन कर इच्छा जोई । निश्चय शिव प्रसाद तेहि होई ॥ 36


पण्डित त्रयोदशी को लावे । ध्यान पूर्वक होम करावे ॥
त्रयोदशी व्रत करै हमेशा । ताके तन नहीं रहै कलेशा ॥
धूप दीप नैवेद्य चढ़ावे । शंकर सम्मुख पाठ सुनावे ॥
जन्म जन्म के पाप नसावे । अन्त धाम शिवपुर में पावे ॥ 40


कहैं अयोध्यादास आस तुम्हारी । जानि सकल दुःख हरहु हमारी ॥


॥ दोहा ॥
नित्त नेम कर प्रातः ही, पाठ करौं चालीसा ।
तुम मेरी मनोकामना, पूर्ण करो जगदीश ॥
मगसर छठि हेमन्त ॠतु, संवत चौसठ जान ।
अस्तुति चालीसा शिवहि, पूर्ण कीन कल्याण ॥


Shiv Chalisa lyrics

Shiv chalisa lyrics 01


Shiv chalisa PDF

PDF डाउनलोड के लिए क्लिक करें


Shiv chalisa lyrics in english

॥ Doha ॥
Jai Ganesh Girija Suvan Mangal Mul Sujan।
Kahat Ayodhya Das Tum Dev Abhaya Varadan ॥


॥ Chaupai ॥
Jai Girija Pati Dinadayala। Sada Karat Santan Pratipala ॥
Bhala Chandrama Sohat Nike Kanan। Kundal Nagaphani Ke ॥
Anga Gaur Shira Ganga Bahaye। Mundamala Tan Chhara Lagaye ॥
Vastra Khala Baghambar Sohain Chhavi। Ko Dekha Naga Muni Mohain ॥4॥


Maina Matu Ki Havai Dulari। Vama Anga Sohat Chhavi Nyari ॥
Kara Trishul Sohat Chhavi Bhari Karat। Sada Shatrun Chhayakari ॥
Nandi Ganesh Sohain Tahan Kaise। Sagar Madhya Kamal Hain Jaise ॥
Kartik Shyam Aur Ganara-U Ya Chhavi। Ko Kahi Jata Na Kauo ॥8॥


Devan Jabahi Jaya Pukara। Tabahi Dukha Prabhu Apa Nivara ॥
Kiya Upadrav Tarak Bhari Devan Sab Mili। Tumahi Juhari ॥
Turata Shadanana Apa Pathayau। Lava-Ni-Mesh Mahan Mari Girayau ॥
Apa Jalandhara Asura Sanhara Suyash। Tumhara Vidit Sansara ॥12॥


Tripurasur Sana Yudha Machayi। Sabhi Kripakar Lina Bachayi ॥
Kiya Tapahin Bhagiratha Bhari Purva। Pratigya Tasu Purari ॥
Danin Mahan Tum Sama Kou Nahin। Sevak Astuti Karat Sadahin ॥
Veda Nam Mahima Tab Gayaee Akatha। Anandi Bhed Nahin Payee ॥16॥


Pragate Udadhi Mantan Men Jvala। Jarat Sura-Sur Bhaye Vihala ॥
Kinha Daya Tahan Kari Sahayee। Nilakantha Tab Nam Kahayee ॥
Pujan Ramchandra Jab Kinha। Jiti Ke Lanka Vibhishan Dinhi ॥
Sahas Kamal Men Ho Rahe Dhari Kinha। Pariksha Tabahin Purari ॥20॥


Ek Kamal Prabhu Rakheu Joi। Kushal-Nain Pujan Chaha Soi ॥
Kathin Bhakti Dekhi Prabhu Shankar। Bhaye Prasanna Diye-Ichchhit Var ॥
Jai Jai Jai Anant Avinashi। Karat Kripa Sabake Ghat Vasi ॥
Dushta Sakal Nit Mohin Satavai। Bhramat Rahe Mohin Chain Na Avai ॥24॥


Shiv Chalisa


Trahi-Trahi Main Nath Pukaro। Yahi Avasar Mohi Ana Ubaro ॥
Lai Trishul Shatrun Ko Maro। Sankat Se Mohin Ana Ubaro ॥
Mata Pita Bhrata Sab Hoi। Sankat Men Puchhat Nahin Koi ॥
Svami Ek Hai Asha Tumhari। Ava Harahu Aba Sankat Bhari ॥28॥


Dhan Nirdhan Ko Deta Sadahin। Jo Koi Janche So Phal Pahin ॥
Astuti Kehi Vidhi Karai Tumhari। Kshamahu Nath Aba Chuka Hamari ॥
Shankar Ho Sankat Ke Nishan। Vighna Vinashan Mangal Karan ॥
Yogi Yati Muni Dhyan Lagavan। Sharad Narad Shisha Navavain ॥32॥


Namo Namo Jai Namah Shivaya। Sura Brahmadik Par Na Paya ॥
Jo Yah Patha Karai Man Lai। Tapar Hota Hai Shambhu Sahayee ॥
Riniyan Jo Koi Ho Adhikari। Patha Karai So Pavan Hari ॥
Putra-hin Ichchha Kar Koi। Nischaya Shiva Prasad Tehin Hoi ॥36॥


Pandit Trayodashi Ko Lavai। Dhyan-Purvak Homa Karavai ॥
Trayodashi Vrat Kare Hamesha। Tan Nahin Take Rahe Kalesha ॥
Dhupa Dipa Naivedya Charhavai। Anta Vasa Shivapur Men Pavai ॥
Kahai Ayodhya Asha Tumhari। Jani Sakal Dukha Harahu Hamari ॥40॥


॥ Doha ॥
Nitya Nema kari Pratahi। Patha karau Chalis ॥
Tum Meri Man Kamana। Purna Karahu Jagadish ॥


LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here