Jahan Daya Tahan Dharm Hai | कबीर दास के दोहे

896

Jahan Daya Tahan Dharm Hai

कबीर दास के दोहे

जहाँ दया तहा धर्म है, जहाँ लोभ वहां पाप ।
जहाँ क्रोध तहा काल है, जहाँ क्षमा वहां आप ।

अर्थ – कबीर दास जी कहते हैं कि जहाँ पर दया होती है वही पर धर्म होता है और जहाँ लोभ होता है वहां पाप भी होता है, और जहाँ क्रोध होता है वहां सर्वनाश होता है और जहाँ क्षमा होती है वहाँ परमात्मा होते है।


Jahan Daya Tahan Dharm Hai Kabir das doha

Jahan Daya Tahan Dharm Hai
Jahan Daya Tahan Dharm Hai

Jaha Daya taha dharm hai in English

Jahan Daya Tahan Dharm Hai, Jahan Lobh Wahan Paap.

Jahan Krodh Tahan kaal hai, Jahan Kshma Tahan Aap.

Meaning – Kabir Das ji says that where there is mercy there is religion and where there is greed there is sin, and where there is anger there is destruction and where there is forgiveness there is God.


 

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here