प्रेम न बारी उपजे | Prem na bari upje | Kabir Das

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Prem Na Bari Upaje

Prem na bari upje

प्रेम न बारी उपजे

प्रेम न बारी उपजे, प्रेम न हाट बिकाए ।
राजा प्रजा जो ही रुचे, सिस दे ही ले जाए ।

भावार्थ: कबीर दास जी कहते हैं कि प्रेम कहीं खेतों में नहीं उगता
और नाही प्रेम कहीं बाजार में बिकता है। जिसको प्रेम चाहिए उसे अपना
शीशक्रोध, काम, इच्छा, भय त्यागना होगा।


Prem na bari upaje kabir doha meaning


Prem Na Bari Upaje lyrics in English

Prem Na Bari Upje, Prem Na Haat Bikay.
Raja Praja Jo Hi Ruche, Sis De Hi Le Jaye.

Meaning: Kabir Das ji says that love does not grow anywhere in the fields.
And neither love is sold anywhere in the market. the one who needs love
You have to give up anger, lust, desire and fear.


 

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